By Malay Ojha | Published: 01 July 2026 | 03:29 PM
नीट यूजी 2026 के लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। प्रोविजनल आंसर-की पर करीब 10 हजार आपत्तियां मिलने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार रिजल्ट जल्दी जारी करने के लिए एजेंसी ने मूल्यांकन के तरीके में भी अहम बदलाव किया है, ताकि विवादित सवालों का असर सीधे और पारदर्शी तरीके से अभ्यर्थियों के अंकों में शामिल किया जा सके।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने प्रोविजनल आंसर-की पर मिली आपत्तियों को विशेषज्ञ समिति के पास भेजने के साथ ही ओएमआर शीट के मूल्यांकन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। एजेंसी की कोशिश है कि सभी चरण तय समय में पूरे कर लिए जाएं, जिससे मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया बिना देरी के शुरू हो सके।
प्रोविजनल आंसर-की पर मिलीं करीब 10 हजार आपत्तियां
इस बार अभ्यर्थियों को प्रोविजनल आंसर-की पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 28 जून तक का समय दिया गया था। निर्धारित समय सीमा के भीतर करीब 10 हजार आपत्तियां दर्ज हुईं। इनमें सवालों की भाषा, सही उत्तर, विकल्पों में त्रुटि और पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए सवालों जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कैसे होती है हर आपत्ति की जांच?
आपत्तियां मिलने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी उन्हें सीधे विषय विशेषज्ञों की समिति के पास भेजती है। इस समिति में अलग-अलग विषयों के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल रहते हैं। वे प्रत्येक आपत्ति की जांच पाठ्यक्रम, मानक पुस्तकों और अन्य प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर करते हैं।
अगर जांच में यह पाया जाता है कि किसी सवाल या उसके उत्तर में वास्तव में गलती है, तो उसे संशोधित किया जाता है। जरूरत पड़ने पर संबंधित सवाल को हटाने या सभी योग्य अभ्यर्थियों को बोनस अंक देने का फैसला भी लिया जा सकता है।
ऐसे तैयार होती है अंतिम आंसर-की
विशेषज्ञ समिति की समीक्षा पूरी होने के बाद संशोधित उत्तरों के आधार पर अंतिम आंसर-की तैयार की जाती है। इसे जारी करने से पहले एक बार फिर पूरी सूची का आंतरिक परीक्षण किया जाता है ताकि किसी तरह की तकनीकी या तथ्यात्मक गलती न रह जाए। इसके बाद ही अंतिम आंसर-की सार्वजनिक की जाती है और उसी के आधार पर परिणाम तैयार होता है।
इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया में क्या बदला?
नीट यूजी 2026 में सबसे बड़ा बदलाव उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान किया गया है। इस बार ओएमआर शीट की स्कैनिंग के साथ-साथ विशेषज्ञों की समीक्षा भी समानांतर रूप से की जा रही है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन सवालों पर विवाद है, उनमें जिन अभ्यर्थियों ने सही विकल्प चुना है, उनका मूल्यांकन अंतिम निर्णय के अनुसार तुरंत किया जा सके। इससे बाद में दोबारा पूरी प्रक्रिया दोहराने की जरूरत कम होगी और रिजल्ट जारी करने में समय बचेगा।
अभ्यर्थियों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज होगी। विवादित सवालों पर अंतिम फैसला आते ही संबंधित अभ्यर्थियों के अंक उसी हिसाब से अपडेट किए जा सकेंगे। इससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया समय पर शुरू होने की संभावना बढ़ जाएगी और अभ्यर्थियों को लंबे इंतजार से राहत मिल सकती है।
रिजल्ट पर टिकी लाखों छात्रों की नजर
देशभर के लाखों छात्र अब अंतिम आंसर-की और परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। अंतिम आंसर-की जारी होने के बाद उसी आधार पर मेरिट सूची तैयार होगी और फिर मेडिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में किया गया यह बदलाव रिजल्ट जारी करने की रफ्तार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।



