Wednesday, July 15, 2026
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3 बार फेल, फिर छोड़ा सोशल मीडिया… चौथे प्रयास में बनी अफसर, नेहा ब्याडवाल की कहानी हर यूपीएससी उम्मीदवार को पढ़नी चाहिए

By Malay Ojha | Published: 04 July 2026 | 12:38 PM

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। कई उम्मीदवार वर्षों की मेहनत के बाद भी मंजिल तक नहीं पहुंच पाते। लेकिन राजस्थान की नेहा ब्याडवाल ने लगातार तीन असफलताओं के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदला, सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई और चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर अखिल भारतीय स्तर पर 569वीं रैंक प्राप्त की। उनकी कहानी आज लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

नेहा ब्याडवाल का सपना शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करने का था। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने अपनी तैयारी और मजबूत की, लेकिन दूसरे और तीसरे प्रयास में भी नतीजा निराशाजनक रहा।

चौथे प्रयास में बदली किस्मत
लगातार तीन बार असफल होने के बावजूद नेहा ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण किया। उन्होंने उत्तर लिखने की शैली पर खास ध्यान दिया, नियमित अभ्यास किया और पढ़ाई का समय पहले से ज्यादा व्यवस्थित किया। आखिरकार वर्ष 2021 की परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 960 अंक हासिल करते हुए 569वीं अखिल भारतीय रैंक प्राप्त की।

सोशल मीडिया छोड़ना बना सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
नेहा की सफलता की सबसे खास बात उनकी पढ़ाई की रणनीति रही। तैयारी शुरू करने के समय वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं। उनके विभिन्न मंचों पर एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, लेकिन जल्द ही उन्हें महसूस हुआ कि लगातार मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिताने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

तीन साल तक बनाया डिजिटल दूरी
नेहा ने बिना ज्यादा सोचे बड़ा फैसला लिया और करीब तीन वर्षों तक सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। इस दौरान उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई, रिवीजन और मॉक टेस्ट पर लगाया। उनका मानना है कि यही फैसला उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बना। अतिरिक्त समय मिलने से वह अपनी कमजोरियों पर बेहतर काम कर सकीं।

बचपन से पढ़ाई में रहीं अव्वल
नेहा ब्याडवाल का जन्म 3 जुलाई 1999 को राजस्थान के जयपुर में हुआ। हालांकि उनका बचपन छत्तीसगढ़ के रायपुर में बीता, जहां उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने डीबी गर्ल्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में भी वह अपनी यूनिवर्सिटी की टॉपर रहीं।

पिता ने हर मुश्किल में बढ़ाया हौसला
नेहा के पिता श्रवण कुमार आयकर विभाग में अधिकारी हैं। उन्होंने बचपन से ही बेटी को देश सेवा के लिए प्रेरित किया। जब लगातार तीन असफलताओं के बाद नेहा निराश हुईं, तब परिवार, खासकर उनके पिता ने उनका मनोबल बनाए रखा। यही सहयोग उन्हें दोबारा पूरी ताकत से तैयारी करने के लिए प्रेरित करता रहा।

सफलता का मंत्र क्या है?
नेहा का कहना है कि हर उम्मीदवार की तैयारी का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सफलता के लिए सबसे जरूरी है मानसिक मजबूती। केवल किताबें पढ़ना काफी नहीं होता। समय का सही उपयोग, नियमित अभ्यास, उत्तर लेखन में सुधार और ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी बनाना भी उतना ही जरूरी है।

लाखों युवाओं के लिए बनी मिसाल
आज नेहा ब्याडवाल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो एक-दो असफलताओं के बाद निराश हो जाते हैं। उनका सफर बताता है कि असफलता अंत नहीं होती। सही रणनीति, लगातार मेहनत और धैर्य के साथ किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी आज सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले हजारों छात्रों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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3 बार फेल, फिर छोड़ा सोशल मीडिया… चौथे प्रयास में बनी अफसर, नेहा ब्याडवाल की कहानी हर यूपीएससी उम्मीदवार को पढ़नी चाहिए

By Malay Ojha | Published: 04 July 2026 | 12:38 PM

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। कई उम्मीदवार वर्षों की मेहनत के बाद भी मंजिल तक नहीं पहुंच पाते। लेकिन राजस्थान की नेहा ब्याडवाल ने लगातार तीन असफलताओं के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदला, सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई और चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर अखिल भारतीय स्तर पर 569वीं रैंक प्राप्त की। उनकी कहानी आज लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

नेहा ब्याडवाल का सपना शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करने का था। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने अपनी तैयारी और मजबूत की, लेकिन दूसरे और तीसरे प्रयास में भी नतीजा निराशाजनक रहा।

चौथे प्रयास में बदली किस्मत
लगातार तीन बार असफल होने के बावजूद नेहा ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण किया। उन्होंने उत्तर लिखने की शैली पर खास ध्यान दिया, नियमित अभ्यास किया और पढ़ाई का समय पहले से ज्यादा व्यवस्थित किया। आखिरकार वर्ष 2021 की परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 960 अंक हासिल करते हुए 569वीं अखिल भारतीय रैंक प्राप्त की।

सोशल मीडिया छोड़ना बना सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
नेहा की सफलता की सबसे खास बात उनकी पढ़ाई की रणनीति रही। तैयारी शुरू करने के समय वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं। उनके विभिन्न मंचों पर एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, लेकिन जल्द ही उन्हें महसूस हुआ कि लगातार मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिताने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

तीन साल तक बनाया डिजिटल दूरी
नेहा ने बिना ज्यादा सोचे बड़ा फैसला लिया और करीब तीन वर्षों तक सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। इस दौरान उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई, रिवीजन और मॉक टेस्ट पर लगाया। उनका मानना है कि यही फैसला उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बना। अतिरिक्त समय मिलने से वह अपनी कमजोरियों पर बेहतर काम कर सकीं।

बचपन से पढ़ाई में रहीं अव्वल
नेहा ब्याडवाल का जन्म 3 जुलाई 1999 को राजस्थान के जयपुर में हुआ। हालांकि उनका बचपन छत्तीसगढ़ के रायपुर में बीता, जहां उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने डीबी गर्ल्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में भी वह अपनी यूनिवर्सिटी की टॉपर रहीं।

पिता ने हर मुश्किल में बढ़ाया हौसला
नेहा के पिता श्रवण कुमार आयकर विभाग में अधिकारी हैं। उन्होंने बचपन से ही बेटी को देश सेवा के लिए प्रेरित किया। जब लगातार तीन असफलताओं के बाद नेहा निराश हुईं, तब परिवार, खासकर उनके पिता ने उनका मनोबल बनाए रखा। यही सहयोग उन्हें दोबारा पूरी ताकत से तैयारी करने के लिए प्रेरित करता रहा।

सफलता का मंत्र क्या है?
नेहा का कहना है कि हर उम्मीदवार की तैयारी का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सफलता के लिए सबसे जरूरी है मानसिक मजबूती। केवल किताबें पढ़ना काफी नहीं होता। समय का सही उपयोग, नियमित अभ्यास, उत्तर लेखन में सुधार और ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी बनाना भी उतना ही जरूरी है।

लाखों युवाओं के लिए बनी मिसाल
आज नेहा ब्याडवाल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो एक-दो असफलताओं के बाद निराश हो जाते हैं। उनका सफर बताता है कि असफलता अंत नहीं होती। सही रणनीति, लगातार मेहनत और धैर्य के साथ किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। यही वजह है कि उनकी सफलता की कहानी आज सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले हजारों छात्रों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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