Friday, October 23, 2026
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National

गुजरात के सरकारी स्कूलों में एंट्री के लिए नई शर्त, फोटो-वीडियो और Live Streaming पर भी रोक

By Malay Ojha | Published: 23 October 2026 | 01:20 PM

गुजरात सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर नए नियम लागू करने के लिए सर्कुलर जारी किया है। अब बिना अनुमति कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। स्कूल के प्रिंसिपल या संस्थान प्रमुख से लिखित मंजूरी लेना जरूरी होगा। इसके साथ ही स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगाई गई है।

प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बाद ही मिलेगी एंट्री
नई गाइडलाइन के मुताबिक, स्कूल में आने वाले बाहरी व्यक्ति को प्रवेश से पहले लिखित अनुमति लेनी होगी। उसे अपनी पहचान और अन्य जरूरी जानकारियां भी दर्ज करानी होंगी। हालांकि, अधिकृत सरकारी अधिकारियों को निर्धारित नियमों के तहत इस अनुमति से छूट दी गई है।

शिक्षा विभाग ने यह कदम छात्रों की सुरक्षा, निजता और स्कूल परिसर में उनकी परेशानी रोकने के उद्देश्य से उठाया है। सरकार का कहना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड करने या सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की घटनाओं को रोकना जरूरी है।

रील बनाने और स्कूल में भीड़ जुटाने पर सरकार सख्त
गुजरात बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल के मुताबिक, राज्य में पिछले कुछ समय से स्कूलों में रील बनाने और लोगों के समूह में पहुंचने जैसी गतिविधियां देखने को मिल रही थीं। इससे छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रवेश और रिकॉर्डिंग को लेकर नियम सख्त किए हैं।

शिक्षा मंत्री बोले- स्कूलों में प्रवेश पर पूरी तरह रोक नहीं
शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने बाहरी लोगों के स्कूलों में आने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है। लोग स्कूल जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए प्रिंसिपल या संस्थान प्रमुख की अनुमति लेनी होगी।

मंत्री के अनुसार, इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य बच्चों की प्राइवेसी की रक्षा करना है। स्कूलों में बच्चों के वीडियो रिकॉर्ड करने और उन्हें मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की घटनाओं पर रोक लगाना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

संविधान के अनुच्छेद 21 और प्राइवेसी के अधिकार का हवाला
सरकार ने अपने सर्कुलर में In Loco Parentis के सिद्धांत का भी उल्लेख किया है। इसका अर्थ है कि स्कूल और संबंधित संस्थानों को बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के मामले में अभिभावकों जैसी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

गाइडलाइन में संविधान के अनुच्छेद 21 और सुप्रीम कोर्ट के केएस पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार मामले के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया गया है। इस फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। सरकार का तर्क है कि बच्चों की पहचान और निजी जानकारी की सुरक्षा भी इसी व्यापक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, सरकार पर कमियां छिपाने का आरोप
गुजरात सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार स्कूलों की खराब हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद ऐसे प्रतिबंध लगा रही है, ताकि उसकी कमियां सार्वजनिक न हों।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर प्रशासनिक नाकामियों को छिपाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, स्कूलों में आने-जाने पर नियम लगाने से शिक्षकों की कमी और खराब क्लासरूम की समस्या दूर नहीं होगी।

कांग्रेस ने शिक्षक और क्लासरूम की कमी के आंकड़े गिनाए
मनीष दोशी ने दावा किया कि गुजरात में करीब 40 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। लगभग 42 हजार क्लासरूम खराब हालत में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 3 हजार स्कूलों में केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई हो रही है, जहां 80 हजार से ज्यादा छात्र नामांकित हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, राज्य के लगभग 14,500 स्कूलों में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ना पड़ता है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को प्रवेश संबंधी पाबंदियों के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था की इन बुनियादी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी
बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि नई गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले के बाद अब छात्रों की प्राइवेसी और सुरक्षा के साथ स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है।

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गुजरात के सरकारी स्कूलों में एंट्री के लिए नई शर्त, फोटो-वीडियो और Live Streaming पर भी रोक

By Malay Ojha | Published: 23 October 2026 | 01:20 PM

गुजरात सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर नए नियम लागू करने के लिए सर्कुलर जारी किया है। अब बिना अनुमति कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। स्कूल के प्रिंसिपल या संस्थान प्रमुख से लिखित मंजूरी लेना जरूरी होगा। इसके साथ ही स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगाई गई है।

प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के बाद ही मिलेगी एंट्री
नई गाइडलाइन के मुताबिक, स्कूल में आने वाले बाहरी व्यक्ति को प्रवेश से पहले लिखित अनुमति लेनी होगी। उसे अपनी पहचान और अन्य जरूरी जानकारियां भी दर्ज करानी होंगी। हालांकि, अधिकृत सरकारी अधिकारियों को निर्धारित नियमों के तहत इस अनुमति से छूट दी गई है।

शिक्षा विभाग ने यह कदम छात्रों की सुरक्षा, निजता और स्कूल परिसर में उनकी परेशानी रोकने के उद्देश्य से उठाया है। सरकार का कहना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड करने या सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की घटनाओं को रोकना जरूरी है।

रील बनाने और स्कूल में भीड़ जुटाने पर सरकार सख्त
गुजरात बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल के मुताबिक, राज्य में पिछले कुछ समय से स्कूलों में रील बनाने और लोगों के समूह में पहुंचने जैसी गतिविधियां देखने को मिल रही थीं। इससे छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रवेश और रिकॉर्डिंग को लेकर नियम सख्त किए हैं।

शिक्षा मंत्री बोले- स्कूलों में प्रवेश पर पूरी तरह रोक नहीं
शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने बाहरी लोगों के स्कूलों में आने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है। लोग स्कूल जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए प्रिंसिपल या संस्थान प्रमुख की अनुमति लेनी होगी।

मंत्री के अनुसार, इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य बच्चों की प्राइवेसी की रक्षा करना है। स्कूलों में बच्चों के वीडियो रिकॉर्ड करने और उन्हें मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की घटनाओं पर रोक लगाना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

संविधान के अनुच्छेद 21 और प्राइवेसी के अधिकार का हवाला
सरकार ने अपने सर्कुलर में In Loco Parentis के सिद्धांत का भी उल्लेख किया है। इसका अर्थ है कि स्कूल और संबंधित संस्थानों को बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के मामले में अभिभावकों जैसी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

गाइडलाइन में संविधान के अनुच्छेद 21 और सुप्रीम कोर्ट के केएस पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार मामले के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया गया है। इस फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। सरकार का तर्क है कि बच्चों की पहचान और निजी जानकारी की सुरक्षा भी इसी व्यापक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, सरकार पर कमियां छिपाने का आरोप
गुजरात सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार स्कूलों की खराब हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद ऐसे प्रतिबंध लगा रही है, ताकि उसकी कमियां सार्वजनिक न हों।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर प्रशासनिक नाकामियों को छिपाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, स्कूलों में आने-जाने पर नियम लगाने से शिक्षकों की कमी और खराब क्लासरूम की समस्या दूर नहीं होगी।

कांग्रेस ने शिक्षक और क्लासरूम की कमी के आंकड़े गिनाए
मनीष दोशी ने दावा किया कि गुजरात में करीब 40 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। लगभग 42 हजार क्लासरूम खराब हालत में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 3 हजार स्कूलों में केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई हो रही है, जहां 80 हजार से ज्यादा छात्र नामांकित हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, राज्य के लगभग 14,500 स्कूलों में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ना पड़ता है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को प्रवेश संबंधी पाबंदियों के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था की इन बुनियादी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी
बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि नई गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले के बाद अब छात्रों की प्राइवेसी और सुरक्षा के साथ स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है।

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