By Malay Ojha | Published: 30 September 2026 | 07:04 PM
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में मेडिकल तकनीक और अकादमिक गतिविधियों से जुड़े दो अहम अपडेट सामने आए हैं। IMS-BHU के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सहायक आचार्य डॉ. आलोक राय ने अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया में छह सप्ताह की AO Trauma Fellowship पूरी की है। वहीं कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की पत्रिका ‘संचेतना’ के विशेषांक का विमोचन किया।
AO Foundation, Davos, Switzerland की ओर से प्रायोजित फेलोशिप के दौरान डॉ. राय ने कूल्हे और घुटने की सर्जरी से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लिया। इसमें रोबोटिक-असिस्टेड और मिनिमली इनवेसिव जॉइंट रिप्लेसमेंट, घुटना प्रत्यारोपण, आंशिक घुटना प्रत्यारोपण और कूल्हे के प्रत्यारोपण की तकनीकें शामिल रहीं।
BHU में पहले से शुरू कर चुके हैं आधुनिक सर्जरी
डॉ. राय IMS-BHU में उन्नत जॉइंट रिप्लेसमेंट सेवाओं को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। विश्वविद्यालय में उनके द्वारा रोबोटिक-असिस्टेड घुटना प्रत्यारोपण, आंशिक घुटना प्रत्यारोपण और मिनिमली इनवेसिव डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी शुरू की गई है। फेलोशिप से मिले अनुभव से इन सेवाओं को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
‘संचेतना’ में BHU की उपलब्धियों और नई पहलों की झलक
इसी बीच कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने BHU की पत्रिका ‘संचेतना’ के विशेषांक का विमोचन किया। ‘परंपरा के साथ, प्रगति के पथ पर’ थीम पर तैयार इस अंक में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, शोध, डिजिटल पहलों, प्रयोगशालाओं और विरासत से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।
पेड़-पौधों से लेकर तकनीक तक कई विषय शामिल
विशेषांक में BHU की वृक्ष संपदा और उसके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में IPRTT Cell की भूमिका, ‘स्पंदन’ के जरिए युवा प्रतिभाओं को मंच, महामना अभिलेखागार और विश्वविद्यालय की विभिन्न प्रयोगशालाओं की उपलब्धियों पर सामग्री दी गई है। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए शुरू की गई डिजिटल पहलों की जानकारी भी पत्रिका में शामिल है।
युवाओं तक पत्रिका पहुंचाने पर जोर
विमोचन के दौरान कुलपति ने ‘संचेतना’ को विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने वाली पहल बताया। उन्होंने पत्रिका को युवाओं से जोड़ने के लिए BHU की वेबसाइट और ‘नमस्ते BHU’ ऐप जैसे माध्यमों के इस्तेमाल पर जोर दिया। बाह्य सम्प्रेषण के आचार्य प्रभारी प्रो. अनुराग दवे ने बताया कि पत्रिका शुरू करने का उद्देश्य विश्वविद्यालय में हो रही नई पहलों का व्यवस्थित और लंबे समय तक उपयोगी दस्तावेज तैयार करना है। भविष्य में इसे द्विभाषी रूप में प्रकाशित करने पर भी विचार किया जा रहा है।



