देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा परीक्षा को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कोई गांव में रहकर तैयारी कर रहा है तो कोई दूसरे शहर में कमरा लेकर दिन-रात पढ़ाई में जुटा है। इसी बीच संघ लोक सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़ दिए हैं।
आयोग की ओर से भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ को नए परीक्षा केंद्र के रूप में शामिल किया गया है। इसके बाद अब सिविल सेवा परीक्षा के कुल केंद्रों की संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है। आयोग का मानना है कि इससे पुराने केंद्रों पर बढ़ता दबाव कम होगा और छात्रों को परीक्षा देने में ज्यादा सुविधा मिलेगी।
23 हजार से ज्यादा छात्रों ने चुने नए सेंटर
यूपीएससी के मुताबिक करीब 23 हजार अभ्यर्थियों ने नए जोड़े गए केंद्रों को अपनी पहली पसंद बनाया है। इससे यह साफ हो गया है कि छात्रों को लंबे समय से नए केंद्रों की जरूरत महसूस हो रही थी।
सफर और खर्च की परेशानी होगी कम
हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा देने के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। इससे यात्रा, रहने और खाने का खर्च बढ़ जाता है। कई छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नए केंद्र बनने के बाद हजारों अभ्यर्थियों को इस परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
छात्रों की सुविधा पर आयोग का जोर
संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि आयोग लगातार परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा आसान और छात्र हित में बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उनके मुताबिक नए केंद्र जोड़ने का मकसद केवल भीड़ कम करना नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना भी है।
भुवनेश्वर सेंटर को मिला सबसे ज्यादा रिस्पॉन्स
नए परीक्षा केंद्रों में भुवनेश्वर को सबसे ज्यादा पसंद किया गया। यहां 10,656 अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र चुना। इससे कटक केंद्र पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कानपुर और मेरठ से भी छात्रों को राहत
कानपुर केंद्र को 6,938 छात्रों ने चुना, जिससे लखनऊ केंद्र पर भीड़ घटेगी। वहीं मेरठ केंद्र को 5,902 उम्मीदवारों ने अपनी पसंद बनाया। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्रों को खास फायदा मिलेगा और उन्हें अब गाजियाबाद जैसे दूर केंद्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी
आयोग का कहना है कि आने वाले समय में भी परीक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा। बढ़ती अभ्यर्थियों की संख्या को देखते हुए केंद्रों का विस्तार भविष्य में भी जारी रह सकता है।



