Wednesday, July 15, 2026
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कक्षा 9 के लिए बदले भाषा पढ़ाई के नियम, कक्षा 10 वालों को राहत; CBSE की नई गाइडलाइन में जानिए आपके बच्चे पर क्या होगा असर

By Malay Ojha | Published: 12 July 2026 | 01:13 PM

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली नई तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। हालांकि कक्षा 10 के छात्रों के लिए इस सत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे पहले की तरह दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का मकसद छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ डालना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में दाखिला लेने वाले सभी विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी अनिवार्य होंगी। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी है। तीसरी भाषा को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका मूल्यांकन संबंधित स्कूल अपने स्तर पर करेगा और उसी के आधार पर छात्र की प्रगति तय होगी।

कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
बोर्ड ने साफ किया है कि सत्र 2026-27 में कक्षा 10 के विद्यार्थियों के परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव नहीं होगा। वे पहले की तरह केवल दो भाषाओं की बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा का अलग से बोर्ड पेपर नहीं होगा। इससे मौजूदा कक्षा 10 के छात्रों को किसी नए परीक्षा प्रारूप का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अगर तीसरी भाषा में छात्र पास नहीं हुआ तो क्या होगा?
यदि कोई विद्यार्थी कक्षा 9 में तीसरी भाषा की स्कूल परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तब भी उसे कक्षा 10 में प्रवेश मिल जाएगा। लेकिन उसे कक्षा 10 के दौरान तीसरी भाषा की परीक्षा पास करनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भले ही इस विषय की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन माध्यमिक परीक्षा का अंतिम प्रमाणपत्र तभी जारी किया जाएगा, जब छात्र स्कूल स्तर पर आयोजित तीसरी भाषा की परीक्षा में सफल होगा।

किन विद्यार्थियों को मिलेगी राहत?
सीबीएसई ने कुछ विशेष श्रेणियों के विद्यार्थियों को इस व्यवस्था से छूट भी दी है। दिव्यांग विद्यार्थियों को दिव्यांगजन अधिकार कानून-2016 के प्रावधानों के तहत तीसरी भाषा पढ़ने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। इसके अलावा भारत के बाहर संचालित सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ने की बाध्यता नहीं होगी। विदेश से भारत आने वाले विदेशी विद्यार्थियों को भी इस नियम में छूट दी गई है।

दूसरे राज्य में स्कूल बदलने पर क्या होगा?
कई बार माता-पिता के स्थानांतरण के कारण विद्यार्थियों को दूसरे राज्य के स्कूल में प्रवेश लेना पड़ता है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने व्यवस्था की है कि छात्र मध्य कक्षाओं में चुनी गई तीसरी भाषा को कक्षा 9 में भी जारी रख सकेगा। संबंधित स्कूलों को ऐसे विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

भाषा शिक्षक नहीं होने पर स्कूल क्या करेंगे?
कई स्कूलों में भाषा शिक्षकों की कमी को देखते हुए बोर्ड ने वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई है। स्कूल जरूरत पड़ने पर अपने मौजूदा शिक्षकों की सेवाएं ले सकते हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर योग्य शिक्षकों, स्कूल समूहों के बीच शिक्षक साझा करने की व्यवस्था तथा ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यम से भी पढ़ाई कराई जा सकेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई शिक्षक की कमी के कारण प्रभावित न हो।

रटने नहीं, समझ के साथ भाषा सीखने पर जोर
बोर्ड का कहना है कि नई भाषा व्यवस्था केवल औपचारिक नियम नहीं है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा को समझने, बोलने और व्यवहार में इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करना है। इसलिए पढ़ाई को रटने के बजाय व्यावहारिक और गतिविधि आधारित बनाया जाएगा। बोर्ड स्कूलों को प्रशिक्षण, अध्ययन सामग्री और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सहायता भी उपलब्ध कराएगा ताकि नई व्यवस्था को बिना किसी परेशानी के लागू किया जा सके।

क्या है बोर्ड का संदेश?
सीबीएसई ने दोहराया है कि नई तीन-भाषा व्यवस्था लागू करते समय किसी भी विद्यार्थी का शैक्षणिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां स्कूलों को अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। बोर्ड का मानना है कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए यह व्यवस्था लंबे समय में लाभदायक साबित होगी।

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कक्षा 9 के लिए बदले भाषा पढ़ाई के नियम, कक्षा 10 वालों को राहत; CBSE की नई गाइडलाइन में जानिए आपके बच्चे पर क्या होगा असर

By Malay Ojha | Published: 12 July 2026 | 01:13 PM

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली नई तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। हालांकि कक्षा 10 के छात्रों के लिए इस सत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे पहले की तरह दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का मकसद छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ डालना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9 में दाखिला लेने वाले सभी विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी अनिवार्य होंगी। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी है। तीसरी भाषा को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका मूल्यांकन संबंधित स्कूल अपने स्तर पर करेगा और उसी के आधार पर छात्र की प्रगति तय होगी।

कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
बोर्ड ने साफ किया है कि सत्र 2026-27 में कक्षा 10 के विद्यार्थियों के परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव नहीं होगा। वे पहले की तरह केवल दो भाषाओं की बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा का अलग से बोर्ड पेपर नहीं होगा। इससे मौजूदा कक्षा 10 के छात्रों को किसी नए परीक्षा प्रारूप का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अगर तीसरी भाषा में छात्र पास नहीं हुआ तो क्या होगा?
यदि कोई विद्यार्थी कक्षा 9 में तीसरी भाषा की स्कूल परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तब भी उसे कक्षा 10 में प्रवेश मिल जाएगा। लेकिन उसे कक्षा 10 के दौरान तीसरी भाषा की परीक्षा पास करनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भले ही इस विषय की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन माध्यमिक परीक्षा का अंतिम प्रमाणपत्र तभी जारी किया जाएगा, जब छात्र स्कूल स्तर पर आयोजित तीसरी भाषा की परीक्षा में सफल होगा।

किन विद्यार्थियों को मिलेगी राहत?
सीबीएसई ने कुछ विशेष श्रेणियों के विद्यार्थियों को इस व्यवस्था से छूट भी दी है। दिव्यांग विद्यार्थियों को दिव्यांगजन अधिकार कानून-2016 के प्रावधानों के तहत तीसरी भाषा पढ़ने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। इसके अलावा भारत के बाहर संचालित सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ने की बाध्यता नहीं होगी। विदेश से भारत आने वाले विदेशी विद्यार्थियों को भी इस नियम में छूट दी गई है।

दूसरे राज्य में स्कूल बदलने पर क्या होगा?
कई बार माता-पिता के स्थानांतरण के कारण विद्यार्थियों को दूसरे राज्य के स्कूल में प्रवेश लेना पड़ता है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने व्यवस्था की है कि छात्र मध्य कक्षाओं में चुनी गई तीसरी भाषा को कक्षा 9 में भी जारी रख सकेगा। संबंधित स्कूलों को ऐसे विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

भाषा शिक्षक नहीं होने पर स्कूल क्या करेंगे?
कई स्कूलों में भाषा शिक्षकों की कमी को देखते हुए बोर्ड ने वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई है। स्कूल जरूरत पड़ने पर अपने मौजूदा शिक्षकों की सेवाएं ले सकते हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर योग्य शिक्षकों, स्कूल समूहों के बीच शिक्षक साझा करने की व्यवस्था तथा ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यम से भी पढ़ाई कराई जा सकेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई शिक्षक की कमी के कारण प्रभावित न हो।

रटने नहीं, समझ के साथ भाषा सीखने पर जोर
बोर्ड का कहना है कि नई भाषा व्यवस्था केवल औपचारिक नियम नहीं है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा को समझने, बोलने और व्यवहार में इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करना है। इसलिए पढ़ाई को रटने के बजाय व्यावहारिक और गतिविधि आधारित बनाया जाएगा। बोर्ड स्कूलों को प्रशिक्षण, अध्ययन सामग्री और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सहायता भी उपलब्ध कराएगा ताकि नई व्यवस्था को बिना किसी परेशानी के लागू किया जा सके।

क्या है बोर्ड का संदेश?
सीबीएसई ने दोहराया है कि नई तीन-भाषा व्यवस्था लागू करते समय किसी भी विद्यार्थी का शैक्षणिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां स्कूलों को अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। बोर्ड का मानना है कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए यह व्यवस्था लंबे समय में लाभदायक साबित होगी।

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