Sunday, July 26, 2026
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NEET में शानदार रैंक के बाद छोड़ा AIIMS-JIPMER, अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं अभिधा बैरेटो

By Malay Ojha | Published: 21 July 2026 | 06:53 PM

नीट में शानदार प्रदर्शन के बाद ज्यादातर छात्रों का सपना एम्स या जिपमर जैसे देश के बड़े मेडिकल संस्थानों में दाखिला लेने का होता है। लेकिन गोवा की अभिधा बैरेटो ने अपने लिए कुछ अलग चुना। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय, पुणे को चुना। अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट और मेडिकल ऑफिसर के तौर पर कमीशन हासिल कर चुकी हैं।

गोवा के कनाकोना इलाके की रहने वाली अभिधा बैरेटो ने वर्ष 2021 में नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने अपने राज्य में पहला स्थान हासिल किया था। इस सफलता के बाद उनके सामने देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई करने के रास्ते खुले। एम्स और जिपमर जैसे संस्थानों में दाखिले का अवसर मिलने के बावजूद अभिधा ने अपना लक्ष्य कुछ और तय कर रखा था।

मेडिकल की पढ़ाई के साथ सेना में सेवा का सपना
अभिधा ने सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय को इसलिए चुना, क्योंकि यहां डॉक्टर बनने के साथ भारतीय सेना में सेवा करने का अवसर भी मिलता है। उनके लिए यह सिर्फ मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने का रास्ता नहीं था, बल्कि देश की सेवा करने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने का जरिया भी था।

परिवार में कोई सेना में नहीं, फिर भी वर्दी ने बदली सोच
एक पुराने इंटरव्यू में अभिधा ने बताया था कि उनके परिवार में कोई भी व्यक्ति सेना में नहीं रहा है। इसके बावजूद बचपन में सेना की वर्दी पहने एक अधिकारी को देखने के बाद उनके मन में देश सेवा का विचार आया। यही सपना धीरे-धीरे उनके जीवन का लक्ष्य बन गया।

12वीं में शिक्षकों ने बताया था एएफएमसी के बारे में
कक्षा 12 में पढ़ाई के दौरान उनके शिक्षकों ने उन्हें सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय के बारे में जानकारी दी। अभिधा को यह बात काफी पसंद आई कि इस संस्थान से डॉक्टर बनने के साथ देश की सेना में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर सेवा करने का मौका भी मिलता है। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा तय कर ली।

पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन, कई मेडल जीते
पुणे स्थित सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान अभिधा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। मेडिकल की पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ उन्होंने दूसरी गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें दीक्षांत समारोह में मेजर जनरल एन.डी.पी. करानी ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्नातक वर्ग के दूसरे सर्वश्रेष्ठ छात्र को दिया जाता है।

14 में से 13 विषयों में हासिल की डिस्टिंक्शन
अभिधा की शैक्षणिक उपलब्धियां भी काफी खास रही हैं। उन्होंने एमबीबीएस के कुल 14 विषयों में से 13 में डिस्टिंक्शन हासिल की। इसके अलावा शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान, बाल चिकित्सा और चिकित्सा विज्ञान जैसे विषयों में उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीते। मेडिकल की पढ़ाई के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में भी वह सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों में रहीं।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, खेलों में भी दिखाया दम
अभिधा की उपलब्धियों का दायरा केवल मेडिकल की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से एथलेटिक्स में भी प्रतिनिधित्व किया। दौड़ की कई स्पर्धाओं और रिले प्रतियोगिताओं में उन्होंने जीत दर्ज की।

फुटबॉल टीम की कप्तानी भी संभाली
खेलों के प्रति उनकी रुचि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने लड़कियों की फुटबॉल टीम की कप्तानी भी की। इसके अलावा पुणे में आयोजित कई फुल और हाफ मैराथन में भी उन्होंने हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन किया। पढ़ाई, खेल और अन्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में अपनी अलग पहचान बनाई।

अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं अभिधा
एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिधा बैरेटो ने अपने उस सपने की ओर कदम बढ़ाया, जिसे उन्होंने स्कूल के दिनों में देखा था। उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर मेडिकल ऑफिसर के तौर पर कमीशन मिला है। यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने मेडिकल करियर के साथ देश सेवा का रास्ता चुना।

जम्मू में इंटर्नशिप से शुरू होगी नई जिम्मेदारी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभिधा ने अपनी इंटर्नशिप के लिए जम्मू को चुना है। यहां वह सेना की मेडिकल सेवाओं से जुड़कर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। एक मेडिकल छात्रा से सेना की मेडिकल ऑफिसर तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए खास संदेश देता है, जो डॉक्टर बनने के साथ देश की सेवा करने का सपना देखते हैं।

एम्स-जिपमर के बजाय एएफएमसी चुनने का फैसला बना मिसाल
नीट में राज्य में पहला स्थान हासिल करने के बाद अभिधा के पास देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ने का विकल्प था। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा रास्ता चुना, जिसमें मेडिकल पेशे के साथ अनुशासन, जिम्मेदारी और देश सेवा का अवसर भी शामिल था। सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी शैक्षणिक और खेल उपलब्धियां बताती हैं कि उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण सफर में खुद को लगातार साबित किया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी अभिधा की कहानी
अभिधा बैरेटो की कहानी सिर्फ एक मेडिकल छात्रा के सेना में डॉक्टर बनने की कहानी नहीं है। यह उस सोच की मिसाल भी है, जिसमें करियर का फैसला केवल प्रतिष्ठित संस्थान या बड़ी नौकरी के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि अपने लक्ष्य और जुनून को प्राथमिकता दी जाती है। नीट में शानदार प्रदर्शन से लेकर एमबीबीएस में बेहतरीन उपलब्धियां हासिल करने और फिर भारतीय सेना में मेडिकल ऑफिसर बनने तक का उनका सफर निश्चित तौर पर मेडिकल की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं को प्रेरित कर सकता है।

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NEET में शानदार रैंक के बाद छोड़ा AIIMS-JIPMER, अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं अभिधा बैरेटो

By Malay Ojha | Published: 21 July 2026 | 06:53 PM

नीट में शानदार प्रदर्शन के बाद ज्यादातर छात्रों का सपना एम्स या जिपमर जैसे देश के बड़े मेडिकल संस्थानों में दाखिला लेने का होता है। लेकिन गोवा की अभिधा बैरेटो ने अपने लिए कुछ अलग चुना। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय, पुणे को चुना। अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट और मेडिकल ऑफिसर के तौर पर कमीशन हासिल कर चुकी हैं।

गोवा के कनाकोना इलाके की रहने वाली अभिधा बैरेटो ने वर्ष 2021 में नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने अपने राज्य में पहला स्थान हासिल किया था। इस सफलता के बाद उनके सामने देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई करने के रास्ते खुले। एम्स और जिपमर जैसे संस्थानों में दाखिले का अवसर मिलने के बावजूद अभिधा ने अपना लक्ष्य कुछ और तय कर रखा था।

मेडिकल की पढ़ाई के साथ सेना में सेवा का सपना
अभिधा ने सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय को इसलिए चुना, क्योंकि यहां डॉक्टर बनने के साथ भारतीय सेना में सेवा करने का अवसर भी मिलता है। उनके लिए यह सिर्फ मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने का रास्ता नहीं था, बल्कि देश की सेवा करने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने का जरिया भी था।

परिवार में कोई सेना में नहीं, फिर भी वर्दी ने बदली सोच
एक पुराने इंटरव्यू में अभिधा ने बताया था कि उनके परिवार में कोई भी व्यक्ति सेना में नहीं रहा है। इसके बावजूद बचपन में सेना की वर्दी पहने एक अधिकारी को देखने के बाद उनके मन में देश सेवा का विचार आया। यही सपना धीरे-धीरे उनके जीवन का लक्ष्य बन गया।

12वीं में शिक्षकों ने बताया था एएफएमसी के बारे में
कक्षा 12 में पढ़ाई के दौरान उनके शिक्षकों ने उन्हें सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय के बारे में जानकारी दी। अभिधा को यह बात काफी पसंद आई कि इस संस्थान से डॉक्टर बनने के साथ देश की सेना में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर सेवा करने का मौका भी मिलता है। इसके बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा तय कर ली।

पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन, कई मेडल जीते
पुणे स्थित सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान अभिधा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। मेडिकल की पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ उन्होंने दूसरी गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें दीक्षांत समारोह में मेजर जनरल एन.डी.पी. करानी ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। यह सम्मान स्नातक वर्ग के दूसरे सर्वश्रेष्ठ छात्र को दिया जाता है।

14 में से 13 विषयों में हासिल की डिस्टिंक्शन
अभिधा की शैक्षणिक उपलब्धियां भी काफी खास रही हैं। उन्होंने एमबीबीएस के कुल 14 विषयों में से 13 में डिस्टिंक्शन हासिल की। इसके अलावा शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान, बाल चिकित्सा और चिकित्सा विज्ञान जैसे विषयों में उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीते। मेडिकल की पढ़ाई के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में भी वह सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों में रहीं।

सिर्फ पढ़ाई नहीं, खेलों में भी दिखाया दम
अभिधा की उपलब्धियों का दायरा केवल मेडिकल की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से एथलेटिक्स में भी प्रतिनिधित्व किया। दौड़ की कई स्पर्धाओं और रिले प्रतियोगिताओं में उन्होंने जीत दर्ज की।

फुटबॉल टीम की कप्तानी भी संभाली
खेलों के प्रति उनकी रुचि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने लड़कियों की फुटबॉल टीम की कप्तानी भी की। इसके अलावा पुणे में आयोजित कई फुल और हाफ मैराथन में भी उन्होंने हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन किया। पढ़ाई, खेल और अन्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने मेडिकल कॉलेज में अपनी अलग पहचान बनाई।

अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं अभिधा
एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिधा बैरेटो ने अपने उस सपने की ओर कदम बढ़ाया, जिसे उन्होंने स्कूल के दिनों में देखा था। उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर मेडिकल ऑफिसर के तौर पर कमीशन मिला है। यह उपलब्धि उनके लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने मेडिकल करियर के साथ देश सेवा का रास्ता चुना।

जम्मू में इंटर्नशिप से शुरू होगी नई जिम्मेदारी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभिधा ने अपनी इंटर्नशिप के लिए जम्मू को चुना है। यहां वह सेना की मेडिकल सेवाओं से जुड़कर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। एक मेडिकल छात्रा से सेना की मेडिकल ऑफिसर तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए खास संदेश देता है, जो डॉक्टर बनने के साथ देश की सेवा करने का सपना देखते हैं।

एम्स-जिपमर के बजाय एएफएमसी चुनने का फैसला बना मिसाल
नीट में राज्य में पहला स्थान हासिल करने के बाद अभिधा के पास देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ने का विकल्प था। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा रास्ता चुना, जिसमें मेडिकल पेशे के साथ अनुशासन, जिम्मेदारी और देश सेवा का अवसर भी शामिल था। सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी शैक्षणिक और खेल उपलब्धियां बताती हैं कि उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण सफर में खुद को लगातार साबित किया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी अभिधा की कहानी
अभिधा बैरेटो की कहानी सिर्फ एक मेडिकल छात्रा के सेना में डॉक्टर बनने की कहानी नहीं है। यह उस सोच की मिसाल भी है, जिसमें करियर का फैसला केवल प्रतिष्ठित संस्थान या बड़ी नौकरी के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि अपने लक्ष्य और जुनून को प्राथमिकता दी जाती है। नीट में शानदार प्रदर्शन से लेकर एमबीबीएस में बेहतरीन उपलब्धियां हासिल करने और फिर भारतीय सेना में मेडिकल ऑफिसर बनने तक का उनका सफर निश्चित तौर पर मेडिकल की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं को प्रेरित कर सकता है।

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