Sunday, July 26, 2026
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रूस से MBBS करना कितना महंगा? 6 साल की पढ़ाई, फीस और रहने का पूरा खर्च जान लें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 | 08:39 AM

विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के बीच रूस आज भी एक अहम विकल्प बना हुआ है। इसकी वजह सिर्फ अपेक्षाकृत कम फीस नहीं है, बल्कि वहां के कई पुराने और प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई का मौका भी है। हालांकि रूस में एमबीबीएस का फैसला केवल कम फीस देखकर करना भारी पड़ सकता है। 6 साल की पढ़ाई, विश्वविद्यालय की फीस, छात्रावास, रहने-खाने का खर्च और भारत लौटने के बाद लागू नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पाना आसान नहीं है। दूसरी ओर, निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई का कुल खर्च कई छात्रों और परिवारों के बजट से बाहर हो सकता है। ऐसे में विदेश में मेडिकल शिक्षा भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक विकल्प बनकर सामने आती है। रूस भी इसी वजह से लंबे समय से भारतीय छात्रों की पसंद में शामिल रहा है।

रूस के कई चिकित्सा विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों को पढ़ाई का अवसर मिलता है। यहां की कुछ सरकारी संस्थाएं अपेक्षाकृत कम शुल्क पर चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराती हैं। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र रूस के अलग-अलग शहरों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाते हैं।

रूस में MBBS की फीस कितनी होती है?
रूस में मेडिकल की पढ़ाई की फीस हर विश्वविद्यालय में एक जैसी नहीं होती। शहर, विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और पाठ्यक्रम के आधार पर शुल्क में काफी अंतर देखने को मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई विश्वविद्यालयों में सालाना पढ़ाई का खर्च करीब ढाई लाख रुपये से साढ़े छह लाख रुपये के बीच हो सकता है।

कुछ प्रतिष्ठित और बड़े विश्वविद्यालयों में यह फीस इससे अधिक भी हो सकती है। इसलिए किसी भी छात्र को दाखिला लेने से पहले केवल पहले साल की फीस देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पूरे छह साल की पढ़ाई के दौरान फीस में होने वाले संभावित बदलाव और दूसरे अनिवार्य शुल्क की जानकारी भी पहले से हासिल करनी चाहिए।

छह साल में कुल खर्च कितना पहुंच सकता है?
रूस में मेडिकल शिक्षा का पाठ्यक्रम आमतौर पर छह साल का होता है। छह साल की पूरी पढ़ाई के दौरान केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि छात्रावास, भोजन, स्थानीय यात्रा, बीमा, वीजा और दूसरे जरूरी खर्च भी जुड़ते हैं।

कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और छात्रावास को मिलाकर छह साल का कुल खर्च करीब 18 लाख रुपये से 45 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि यह आंकड़ा सभी संस्थानों पर लागू नहीं होता। कुछ बड़े और महंगे विश्वविद्यालयों में कुल खर्च इससे काफी अधिक भी हो सकता है।

छात्रावास की फीस भी बजट में जोड़ें
विदेश में पढ़ाई की योजना बनाते समय छात्र अक्सर सिर्फ विश्वविद्यालय की फीस पर ध्यान देते हैं। लेकिन रूस में रहने के लिए छात्रावास का खर्च भी कुल बजट का अहम हिस्सा है। अलग-अलग विश्वविद्यालयों में छात्रावास की सुविधा और शुल्क अलग-अलग हो सकता है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कई संस्थानों में छात्रावास का सालाना खर्च करीब 14 हजार रुपये से 90 हजार रुपये के बीच हो सकता है। हालांकि शहर और सुविधा के हिसाब से यह रकम बदल सकती है। इसलिए दाखिले से पहले विश्वविद्यालय से छात्रावास की फीस और उपलब्ध सुविधाओं की पूरी जानकारी लेना बेहतर होता है।

रहने और खाने पर हर महीने कितना खर्च होगा?
रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए मासिक खर्च भी शहर के हिसाब से बदलता है। राजधानी और बड़े शहरों में रोजमर्रा की जरूरतों पर अधिक पैसा खर्च हो सकता है, जबकि छोटे और मध्यम शहरों में रहने का खर्च अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

एक छात्र के लिए सामान्य और आरामदायक जीवनशैली के हिसाब से हर महीने करीब 11 हजार रुपये से 17 हजार रुपये तक का खर्च अनुमानित किया जा सकता है। इसमें भोजन, स्थानीय परिवहन, मोबाइल, इंटरनेट, पढ़ाई से जुड़ी सामग्री और रोजमर्रा की दूसरी जरूरतें शामिल हो सकती हैं। हालांकि किसी छात्र की व्यक्तिगत जीवनशैली के अनुसार यह खर्च कम या ज्यादा हो सकता है।

इन विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की रुचि
रूस में कई मेडिकल विश्वविद्यालय भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। इनमें अस्त्रखान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बेलगोरोद स्टेट यूनिवर्सिटी, चुवाश स्टेट यूनिवर्सिटी, दागेस्तान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और सेचेनोव फर्स्ट मॉस्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे नाम शामिल हैं।

इन संस्थानों में पढ़ाई की फीस एक-दूसरे से अलग हो सकती है। कुछ विश्वविद्यालयों में सालाना ट्यूशन फीस करीब ढाई लाख रुपये से शुरू होकर 9.6 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। इसी तरह छात्रावास का शुल्क भी विश्वविद्यालय के अनुसार अलग-अलग होता है।

सिर्फ कम फीस देखकर विश्वविद्यालय न चुनें
विदेश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि छात्र केवल कम फीस देखकर किसी विश्वविद्यालय में दाखिला ले लें। किसी संस्थान का शुल्क कम होना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि वहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में मेडिकल पेशे में आगे बढ़ने की प्रक्रिया आसान होगी।

दाखिला लेने से पहले छात्रों को यह जांचना चाहिए कि संबंधित विश्वविद्यालय और वहां का मेडिकल पाठ्यक्रम भारत में लागू मौजूदा नियमों के अनुरूप है या नहीं। भारत लौटने के बाद विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए लागू लाइसेंसिंग और परीक्षा संबंधी नियमों को भी समझना जरूरी है।

भारत लौटने के बाद के नियमों को भी समझना जरूरी
विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में चिकित्सकीय पेशे में काम करने के लिए भारतीय नियमों का पालन करना होता है। इसलिए रूस जाने से पहले छात्र और उनके अभिभावक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मौजूदा नियमों और विदेशी मेडिकल स्नातकों पर लागू शर्तों की जानकारी जरूर लें।

यह भी देखना जरूरी है कि जिस विश्वविद्यालय में दाखिला लिया जा रहा है, उसका पाठ्यक्रम, पढ़ाई की अवधि, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी शर्तें भारत में लागू नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। नियमों में समय-समय पर बदलाव भी हो सकते हैं, इसलिए दाखिले के समय आधिकारिक जानकारी को ही अंतिम आधार मानना चाहिए।

कुल बजट बनाते समय इन खर्चों को भी न भूलें
रूस में एमबीबीएस की योजना बनाते समय छात्रों को केवल ट्यूशन फीस और छात्रावास का खर्च जोड़कर बजट नहीं बनाना चाहिए। यात्रा, पासपोर्ट, वीजा, स्वास्थ्य बीमा, दस्तावेज तैयार कराने, हवाई यात्रा, किताबों और दूसरे शैक्षणिक सामान पर भी खर्च हो सकता है।

इसके अलावा मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का असर भी कुल खर्च पर पड़ सकता है। भारतीय रुपये और रूसी मुद्रा की विनिमय दर में बदलाव होने पर परिवार का वास्तविक खर्च अनुमान से अलग हो सकता है। इसलिए छह साल की पढ़ाई के लिए बजट बनाते समय कुछ अतिरिक्त राशि सुरक्षित रखना समझदारी होगी।

रूस में MBBS चुनने से पहले पूरी जांच जरूरी
कुल मिलाकर रूस में मेडिकल की पढ़ाई भारतीय छात्रों के लिए एक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसे सिर्फ कम फीस वाला रास्ता मानकर फैसला करना सही नहीं होगा। विश्वविद्यालय की मान्यता, पढ़ाई का ढांचा, कुल फीस, छात्रावास, रहने का खर्च और भारत लौटने के बाद लागू नियम—इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि छात्र किसी एजेंट या सलाहकार की बात पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय विश्वविद्यालय और संबंधित भारतीय नियामक संस्थाओं की आधिकारिक जानकारी खुद भी जांचें। कम फीस के चक्कर में गलत विश्वविद्यालय चुनने से छह साल की पढ़ाई और लाखों रुपये दोनों जोखिम में पड़ सकते हैं। इसलिए रूस में एमबीबीएस का सपना पूरा करने से पहले सही विश्वविद्यालय का चुनाव ही सबसे बड़ा फैसला है।

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रूस से MBBS करना कितना महंगा? 6 साल की पढ़ाई, फीस और रहने का पूरा खर्च जान लें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 | 08:39 AM

विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के बीच रूस आज भी एक अहम विकल्प बना हुआ है। इसकी वजह सिर्फ अपेक्षाकृत कम फीस नहीं है, बल्कि वहां के कई पुराने और प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई का मौका भी है। हालांकि रूस में एमबीबीएस का फैसला केवल कम फीस देखकर करना भारी पड़ सकता है। 6 साल की पढ़ाई, विश्वविद्यालय की फीस, छात्रावास, रहने-खाने का खर्च और भारत लौटने के बाद लागू नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पाना आसान नहीं है। दूसरी ओर, निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई का कुल खर्च कई छात्रों और परिवारों के बजट से बाहर हो सकता है। ऐसे में विदेश में मेडिकल शिक्षा भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक विकल्प बनकर सामने आती है। रूस भी इसी वजह से लंबे समय से भारतीय छात्रों की पसंद में शामिल रहा है।

रूस के कई चिकित्सा विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों को पढ़ाई का अवसर मिलता है। यहां की कुछ सरकारी संस्थाएं अपेक्षाकृत कम शुल्क पर चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराती हैं। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र रूस के अलग-अलग शहरों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाते हैं।

रूस में MBBS की फीस कितनी होती है?
रूस में मेडिकल की पढ़ाई की फीस हर विश्वविद्यालय में एक जैसी नहीं होती। शहर, विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और पाठ्यक्रम के आधार पर शुल्क में काफी अंतर देखने को मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई विश्वविद्यालयों में सालाना पढ़ाई का खर्च करीब ढाई लाख रुपये से साढ़े छह लाख रुपये के बीच हो सकता है।

कुछ प्रतिष्ठित और बड़े विश्वविद्यालयों में यह फीस इससे अधिक भी हो सकती है। इसलिए किसी भी छात्र को दाखिला लेने से पहले केवल पहले साल की फीस देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पूरे छह साल की पढ़ाई के दौरान फीस में होने वाले संभावित बदलाव और दूसरे अनिवार्य शुल्क की जानकारी भी पहले से हासिल करनी चाहिए।

छह साल में कुल खर्च कितना पहुंच सकता है?
रूस में मेडिकल शिक्षा का पाठ्यक्रम आमतौर पर छह साल का होता है। छह साल की पूरी पढ़ाई के दौरान केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि छात्रावास, भोजन, स्थानीय यात्रा, बीमा, वीजा और दूसरे जरूरी खर्च भी जुड़ते हैं।

कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और छात्रावास को मिलाकर छह साल का कुल खर्च करीब 18 लाख रुपये से 45 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि यह आंकड़ा सभी संस्थानों पर लागू नहीं होता। कुछ बड़े और महंगे विश्वविद्यालयों में कुल खर्च इससे काफी अधिक भी हो सकता है।

छात्रावास की फीस भी बजट में जोड़ें
विदेश में पढ़ाई की योजना बनाते समय छात्र अक्सर सिर्फ विश्वविद्यालय की फीस पर ध्यान देते हैं। लेकिन रूस में रहने के लिए छात्रावास का खर्च भी कुल बजट का अहम हिस्सा है। अलग-अलग विश्वविद्यालयों में छात्रावास की सुविधा और शुल्क अलग-अलग हो सकता है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कई संस्थानों में छात्रावास का सालाना खर्च करीब 14 हजार रुपये से 90 हजार रुपये के बीच हो सकता है। हालांकि शहर और सुविधा के हिसाब से यह रकम बदल सकती है। इसलिए दाखिले से पहले विश्वविद्यालय से छात्रावास की फीस और उपलब्ध सुविधाओं की पूरी जानकारी लेना बेहतर होता है।

रहने और खाने पर हर महीने कितना खर्च होगा?
रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए मासिक खर्च भी शहर के हिसाब से बदलता है। राजधानी और बड़े शहरों में रोजमर्रा की जरूरतों पर अधिक पैसा खर्च हो सकता है, जबकि छोटे और मध्यम शहरों में रहने का खर्च अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

एक छात्र के लिए सामान्य और आरामदायक जीवनशैली के हिसाब से हर महीने करीब 11 हजार रुपये से 17 हजार रुपये तक का खर्च अनुमानित किया जा सकता है। इसमें भोजन, स्थानीय परिवहन, मोबाइल, इंटरनेट, पढ़ाई से जुड़ी सामग्री और रोजमर्रा की दूसरी जरूरतें शामिल हो सकती हैं। हालांकि किसी छात्र की व्यक्तिगत जीवनशैली के अनुसार यह खर्च कम या ज्यादा हो सकता है।

इन विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की रुचि
रूस में कई मेडिकल विश्वविद्यालय भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। इनमें अस्त्रखान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, बेलगोरोद स्टेट यूनिवर्सिटी, चुवाश स्टेट यूनिवर्सिटी, दागेस्तान स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और सेचेनोव फर्स्ट मॉस्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे नाम शामिल हैं।

इन संस्थानों में पढ़ाई की फीस एक-दूसरे से अलग हो सकती है। कुछ विश्वविद्यालयों में सालाना ट्यूशन फीस करीब ढाई लाख रुपये से शुरू होकर 9.6 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। इसी तरह छात्रावास का शुल्क भी विश्वविद्यालय के अनुसार अलग-अलग होता है।

सिर्फ कम फीस देखकर विश्वविद्यालय न चुनें
विदेश में मेडिकल की पढ़ाई के लिए सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि छात्र केवल कम फीस देखकर किसी विश्वविद्यालय में दाखिला ले लें। किसी संस्थान का शुल्क कम होना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि वहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में मेडिकल पेशे में आगे बढ़ने की प्रक्रिया आसान होगी।

दाखिला लेने से पहले छात्रों को यह जांचना चाहिए कि संबंधित विश्वविद्यालय और वहां का मेडिकल पाठ्यक्रम भारत में लागू मौजूदा नियमों के अनुरूप है या नहीं। भारत लौटने के बाद विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए लागू लाइसेंसिंग और परीक्षा संबंधी नियमों को भी समझना जरूरी है।

भारत लौटने के बाद के नियमों को भी समझना जरूरी
विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत में चिकित्सकीय पेशे में काम करने के लिए भारतीय नियमों का पालन करना होता है। इसलिए रूस जाने से पहले छात्र और उनके अभिभावक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मौजूदा नियमों और विदेशी मेडिकल स्नातकों पर लागू शर्तों की जानकारी जरूर लें।

यह भी देखना जरूरी है कि जिस विश्वविद्यालय में दाखिला लिया जा रहा है, उसका पाठ्यक्रम, पढ़ाई की अवधि, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी शर्तें भारत में लागू नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। नियमों में समय-समय पर बदलाव भी हो सकते हैं, इसलिए दाखिले के समय आधिकारिक जानकारी को ही अंतिम आधार मानना चाहिए।

कुल बजट बनाते समय इन खर्चों को भी न भूलें
रूस में एमबीबीएस की योजना बनाते समय छात्रों को केवल ट्यूशन फीस और छात्रावास का खर्च जोड़कर बजट नहीं बनाना चाहिए। यात्रा, पासपोर्ट, वीजा, स्वास्थ्य बीमा, दस्तावेज तैयार कराने, हवाई यात्रा, किताबों और दूसरे शैक्षणिक सामान पर भी खर्च हो सकता है।

इसके अलावा मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का असर भी कुल खर्च पर पड़ सकता है। भारतीय रुपये और रूसी मुद्रा की विनिमय दर में बदलाव होने पर परिवार का वास्तविक खर्च अनुमान से अलग हो सकता है। इसलिए छह साल की पढ़ाई के लिए बजट बनाते समय कुछ अतिरिक्त राशि सुरक्षित रखना समझदारी होगी।

रूस में MBBS चुनने से पहले पूरी जांच जरूरी
कुल मिलाकर रूस में मेडिकल की पढ़ाई भारतीय छात्रों के लिए एक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसे सिर्फ कम फीस वाला रास्ता मानकर फैसला करना सही नहीं होगा। विश्वविद्यालय की मान्यता, पढ़ाई का ढांचा, कुल फीस, छात्रावास, रहने का खर्च और भारत लौटने के बाद लागू नियम—इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि छात्र किसी एजेंट या सलाहकार की बात पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय विश्वविद्यालय और संबंधित भारतीय नियामक संस्थाओं की आधिकारिक जानकारी खुद भी जांचें। कम फीस के चक्कर में गलत विश्वविद्यालय चुनने से छह साल की पढ़ाई और लाखों रुपये दोनों जोखिम में पड़ सकते हैं। इसलिए रूस में एमबीबीएस का सपना पूरा करने से पहले सही विश्वविद्यालय का चुनाव ही सबसे बड़ा फैसला है।

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