By Malay Ojha | Published: 05 October 2026 | 10:16 PM
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) ने छात्रों की सामूहिक शिकायतों और मांगों के समाधान के लिए ‘छात्र मामलों पर समन्वय समिति’ (CCSM) का गठन किया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव (शिक्षण) कार्यालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। समिति छात्रों और विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों व कार्यालयों के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं के समाधान में मदद करेगी।
समिति किसी छात्र समूह के साथ खुलकर बातचीत करेगी और उसकी शिकायत, मांग या समस्या को समझेगी। इसके बाद संबंधित विभाग, संकाय, संस्थान या कार्यालय से बात कर उसका पक्ष जाना जाएगा। जरूरत पड़ने पर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता भी की जाएगी, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।
इन मामलों में मिलेगी मदद
छात्रों की सुरक्षा, खेल मैदान, नेटवर्क कनेक्टिविटी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, रखरखाव, उद्यान, परिसर में वाहनों की आवाजाही, शैक्षणिक नियम, परीक्षा, हॉस्टल मेस, पेयजल और अनुशासन जैसे मामले समिति के दायरे में होंगे। समिति का मकसद ऐसी शिकायतों के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
लोकपाल होंगे समिति के अध्यक्ष
अधिसूचना के मुताबिक, BHU के लोकपाल प्रो. एस.एम. सिंह समिति के अध्यक्ष होंगे। मनोविज्ञान विभाग के प्रो. राकेश पांडेय, BHU के पूर्व मुख्य आराक्षाधिकारी प्रो. एस.पी. सिंह और पूर्व छात्र अधिष्ठाता प्रो. ए.के. नेमा को सदस्य बनाया गया है। समिति का शुरुआती कार्यकाल एक वर्ष का होगा, जिसे जरूरत के अनुसार आगे बढ़ाया जा सकेगा।
कुलपति ने बताया संवाद का अहम कदम
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने समिति के गठन को विश्वविद्यालय में बेहतर संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों की बात को ध्यान से सुनना और समस्याओं का समाधान बातचीत, विश्वास और सहयोग के जरिए करना है।
गलतफहमी दूर करने पर भी जोर
समिति शिकायतों पर केवल संबंधित कार्यालय का जवाब लेने तक सीमित नहीं रहेगी। वह तथ्यों की गलतफहमी, जानकारी की कमी और किसी प्रक्रिया या मौजूदा व्यवस्था को लेकर छात्रों में जागरूकता की कमी को भी दूर करने का प्रयास करेगी। इसके लिए विश्वविद्यालय के अलग-अलग अंगों के बीच संवाद कायम किया जाएगा।
छात्रों के नजरिए से देगी सुझाव
समिति जरूरत के अनुसार विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सुझाव भी देगी। समस्याओं के समाधान में शिक्षक, शोध पर्यवेक्षक, वार्डन, प्रॉक्टोरियल बोर्ड, विभागाध्यक्ष और संकाय प्रमुखों की मदद ली जाएगी।
जरूरत पड़ने पर कुलपति को देगी रिपोर्ट
समिति के सदस्य व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तर पर काम कर सकेंगे। इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया के साथ अनौपचारिक संवाद का रास्ता भी अपनाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर समिति अपनी अनुशंसाएं कुलपति के सामने विचार के लिए रखेगी। विश्वविद्यालय के सभी विभागों और संस्थानों से समिति को पूरा सहयोग देने की अपेक्षा की गई है।
BHU में पहली तरह की पहल का दावा
विश्वविद्यालय ने इसे देश के किसी विश्वविद्यालय में संभवतः अपनी तरह की पहली पहल बताया है। समिति के गठन से अब छात्रों की सामूहिक शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए एक तय मंच उपलब्ध होगा।



