By Malay Ojha | Published: 03 October 2026 | 06:12 AM
चिप्स, बिस्किट, नमकीन या मीठे पेय खरीदने से पहले उसमें कितनी चीनी, नमक या वसा है, यह समझना आसान बनाने की तैयारी चल रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड फूड के सामने Front-of-Pack Nutrition Labelling (FoPL) लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ बच्चों को स्कूल स्तर पर पोषण संबंधी जानकारी और फूड लेबल समझाने की योजना पर भी केंद्र से जवाब मांगा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में केंद्र से पूछा था कि स्कूलों में पाठ्यक्रम, वर्कशॉप या दूसरी पहल के जरिए बच्चों को पैकेट पर दी गई Nutrition Information और FoPL को समझना कैसे सिखाया जाएगा। कोर्ट ने बच्चों को बिना जानकारी के खाने-पीने की चीजें चुनने के जोखिम का भी जिक्र किया था। इसके बाद FSSAI ने इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के सामने रखी।
पैकेट के सामने होगा लाल Hexagon
FSSAI के प्रस्ताव में ज्यादा मात्रा में चिंता वाले पोषक तत्व पाए जाने पर पैकेट के सामने लाल रंग का Hexagon Warning Label लगाने की बात कही गई है। प्रस्ताव में HIGH FAT, HIGH SUGAR और HIGH SALT जैसी जानकारी प्रमुखता से दिखाने की बात है। लेबल का फॉन्ट पीछे दिए Nutrition Information Table से कम से कम एक प्वाइंट बड़ा रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
पहले दो चरण, फिर सिंगल फेज का प्रस्ताव
शुरुआती प्रस्ताव में FoPL को दो चरणों में लागू करने की योजना थी। बाद में FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सिंगल-फेज व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। इसके तहत तय सीमा से ज्यादा Added Sugar, Added Fat या Salt वाले उत्पादों को चेतावनी के दायरे में लाने की बात कही गई। कुछ मीठे पेय के लिए भी अलग चेतावनी का प्रस्ताव है।
नियम बनाने में चार महीने का प्रस्ताव
FSSAI ने कोर्ट को बताया कि नए नियमों का मसौदा तैयार करने से लेकर अंतिम अधिसूचना तक करीब चार महीने लग सकते हैं। इसमें मंजूरी, विश्व व्यापार संगठन की प्रक्रिया और कानून मंत्रालय से जुड़ी औपचारिकताएं शामिल हैं। इसके बाद खाद्य कंपनियों को नए लेबल लागू करने के लिए 365 दिन देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस लंबी समयसीमा पर सवाल उठाए और बाद की सुनवाई में टाइमलाइन पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
चीनी और नमक ही नहीं, मीठे पेय भी दायरे में
प्रस्तावित व्यवस्था में ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों पर साफ चेतावनी देने की बात है। कैफीनयुक्त और मीठे पेय के लिए भी अलग प्रावधान का प्रस्ताव रखा गया है। गैर-कैलोरी स्वीटनर के इस्तेमाल की जानकारी भी पैकेट के सामने प्रमुखता से दिखाने का सुझाव दिया गया है।
अभी क्या तय हुआ और क्या बाकी है?
यह व्यवस्था अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के प्रस्ताव में लेबल का रंग, आकार, पोषक तत्वों की सीमा, कंपनियों को मिलने वाली समयसीमा और स्कूलों में Nutrition Literacy जैसे कई मुद्दों पर जवाब मांगा था। सितंबर के अंत में कोर्ट ने FoPL लागू करने की समयसीमा पर भी आपत्ति जताई और मामले में फैसला सुरक्षित रखा। इसलिए फिलहाल प्रस्तावित लाल Hexagon को अंतिम नियम मानना सही नहीं होगा।



