Friday, October 23, 2026
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‘आलसी’ या ‘जिद्दी’ कहने पर रोक, बच्चों की Mental Health को लेकर ओडिशा सरकार की नई SOP

By Malay Ojha | Published: 07 October 2026 | 08:58 PM

बच्चों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव, डिप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक बच्चों और युवाओं की Mental Health को लेकर नई SOP जारी की है। इसमें शिक्षकों और संस्थानों के कर्मचारियों को बच्चों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बच्चों को अपमानित करने से बचना होगा
नई गाइडलाइन के तहत शिक्षकों और कर्मचारियों को किसी बच्चे को ‘आलसी’, ‘जिद्दी’ या किसी दूसरे अपमानजनक शब्द से बुलाने से बचना होगा। क्लास में सबके सामने डांटने या ऐसी टिप्पणी करने से भी मना किया गया है, जिससे बच्चे के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे। सरकार ने बच्चों से बातचीत में पॉजिटिव और भरोसा देने वाली भाषा इस्तेमाल करने पर जोर दिया है।

दो हफ्ते तक बदलाव दिखे तो गंभीरता जरूरी
SOP में बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर खास नजर रखने को कहा गया है। लगातार उदासी, डर, चिड़चिड़ापन, आक्रामकता या दूसरे असामान्य लक्षण अगर दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहते हैं तो इसे चेतावनी का संकेत माना जाएगा। ऐसे मामलों में बच्चे को काउंसलिंग, जरूरी सहायता और जरूरत पड़ने पर Mental Health Expert के पास भेजने की व्यवस्था की गई है।

Green, Yellow और Red कैटेगरी में होगा आकलन
नई व्यवस्था में बच्चों की मानसिक स्थिति और जरूरत के आधार पर उन्हें Green, Yellow और Red कैटेगरी में रखने का प्रावधान किया गया है। इसके आधार पर उनकी देखभाल, निगरानी और आगे की मदद तय की जाएगी। इसका मकसद परेशानी को शुरुआती स्तर पर पहचानकर समय रहते जरूरी सहायता देना है।

परीक्षा के तनाव को कम करने की भी सलाह
SOP में पढ़ाई और परीक्षा के दबाव को कम करने के लिए भी कुछ सुझाव दिए गए हैं। छात्रों को 25 मिनट पढ़ाई के बाद पांच मिनट का ब्रेक लेने, इस दौरान गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस करने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी गई है।

कॉलेज-यूनिवर्सिटी में Mental Health Centre पर जोर
उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भी अलग दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में रैगिंग, भेदभाव, नशे की समस्या, घर से दूर रहने और रिश्तों से जुड़े तनाव जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए Mental Health and Well-being Centres स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

समय रहते मदद पहुंचाना सरकार का लक्ष्य
ओडिशा सरकार की यह SOP ‘Operational Guidelines on Mental Health and Well-being of Children, Adolescents and Young Adults’ रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। इसमें Mental Health Awareness, शुरुआती पहचान, समय पर काउंसलिंग और जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ओडिशा हाई कोर्ट भी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की Mental Health को लेकर सरकार से उठाए गए कदमों की जानकारी मांग चुका है।

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‘आलसी’ या ‘जिद्दी’ कहने पर रोक, बच्चों की Mental Health को लेकर ओडिशा सरकार की नई SOP

By Malay Ojha | Published: 07 October 2026 | 08:58 PM

बच्चों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव, डिप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक बच्चों और युवाओं की Mental Health को लेकर नई SOP जारी की है। इसमें शिक्षकों और संस्थानों के कर्मचारियों को बच्चों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बच्चों को अपमानित करने से बचना होगा
नई गाइडलाइन के तहत शिक्षकों और कर्मचारियों को किसी बच्चे को ‘आलसी’, ‘जिद्दी’ या किसी दूसरे अपमानजनक शब्द से बुलाने से बचना होगा। क्लास में सबके सामने डांटने या ऐसी टिप्पणी करने से भी मना किया गया है, जिससे बच्चे के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे। सरकार ने बच्चों से बातचीत में पॉजिटिव और भरोसा देने वाली भाषा इस्तेमाल करने पर जोर दिया है।

दो हफ्ते तक बदलाव दिखे तो गंभीरता जरूरी
SOP में बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर खास नजर रखने को कहा गया है। लगातार उदासी, डर, चिड़चिड़ापन, आक्रामकता या दूसरे असामान्य लक्षण अगर दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहते हैं तो इसे चेतावनी का संकेत माना जाएगा। ऐसे मामलों में बच्चे को काउंसलिंग, जरूरी सहायता और जरूरत पड़ने पर Mental Health Expert के पास भेजने की व्यवस्था की गई है।

Green, Yellow और Red कैटेगरी में होगा आकलन
नई व्यवस्था में बच्चों की मानसिक स्थिति और जरूरत के आधार पर उन्हें Green, Yellow और Red कैटेगरी में रखने का प्रावधान किया गया है। इसके आधार पर उनकी देखभाल, निगरानी और आगे की मदद तय की जाएगी। इसका मकसद परेशानी को शुरुआती स्तर पर पहचानकर समय रहते जरूरी सहायता देना है।

परीक्षा के तनाव को कम करने की भी सलाह
SOP में पढ़ाई और परीक्षा के दबाव को कम करने के लिए भी कुछ सुझाव दिए गए हैं। छात्रों को 25 मिनट पढ़ाई के बाद पांच मिनट का ब्रेक लेने, इस दौरान गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस करने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी गई है।

कॉलेज-यूनिवर्सिटी में Mental Health Centre पर जोर
उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भी अलग दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में रैगिंग, भेदभाव, नशे की समस्या, घर से दूर रहने और रिश्तों से जुड़े तनाव जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए Mental Health and Well-being Centres स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

समय रहते मदद पहुंचाना सरकार का लक्ष्य
ओडिशा सरकार की यह SOP ‘Operational Guidelines on Mental Health and Well-being of Children, Adolescents and Young Adults’ रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। इसमें Mental Health Awareness, शुरुआती पहचान, समय पर काउंसलिंग और जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ओडिशा हाई कोर्ट भी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की Mental Health को लेकर सरकार से उठाए गए कदमों की जानकारी मांग चुका है।

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