बिहार की नालंदा यूनिवर्सिटी में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं को आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से जोड़ने की अनोखी पहल की जा रही है. यहां छात्र रामायण, महाभारत और भारतीय दर्शन के जरिए अंतरराष्ट्रीय संबंध, कूटनीति, ऊर्जा संकट और विश्व शांति जैसे विषयों पर रिसर्च कर रहे हैं. विश्वविद्यालय का इंटरनेशनल रिलेशन एंड पीस स्टडीज यानी आईआरपीएस कोर्स भारतीय दृष्टिकोण से बदलती वैश्विक राजनीति को समझाने की कोशिश कर रहा है.
विश्वविद्यालय का कहना है कि इस कोर्स का उद्देश्य सिर्फ प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन कराना नहीं, बल्कि उनमें छिपे विचारों को आज की वैश्विक समस्याओं के समाधान से जोड़ना है. कुलपति सचिन चतुर्वेदी के मुताबिक भारतीय सभ्यता की सोच आज भी दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखती है.
राम-सुग्रीव गठबंधन को बताया आधुनिक कूटनीति का उदाहरण
आईआरपीएस की छात्रा सुरभि रानी ने अपने शोध पत्र में राम और सुग्रीव के संबंधों को आधुनिक रणनीतिक साझेदारी का मॉडल बताया है. शोध के अनुसार यह गठबंधन केवल मित्रता नहीं, बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी और नैतिक नेतृत्व पर आधारित था.
वैश्विक साझेदारी में सहयोग और भरोसे पर जोर
रिसर्च में कहा गया है कि राम-सुग्रीव संबंध ऐसी कूटनीति को दर्शाता है, जहां प्रभुत्व की जगह सहयोग और भरोसे को प्राथमिकता दी गई. शोधकर्ताओं ने इसे वर्तमान विदेश नीति और विश्व बंधुत्व की सोच से भी जोड़ा है. उनका मानना है कि भारतीय महाकाव्य आधुनिक विदेश नीति को समझने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं.
भगवान कृष्ण की नीति को जोड़ा आधुनिक विश्व व्यवस्था से
एक अन्य शोध में छात्रा प्रीति कुमारी ने भगवान कृष्ण की रणनीतियों को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जोड़ा है. उनके मुताबिक कृष्ण का दर्शन न्यायपूर्ण युद्ध और नैतिक शक्ति की अवधारणा को मजबूत करता है.
आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भी हो रहा अध्ययन
रिसर्च में यह भी बताया गया कि जैसे कृष्ण ने नियम तोड़ने वालों का समर्थन नहीं किया, उसी तरह आज दुनिया आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले देशों से जूझ रही है. इस अध्ययन में महाभारत को आधुनिक वैश्विक व्यवस्था और सॉफ्ट पावर की सोच से जोड़ा गया है.
पर्यावरण और ऊर्जा संकट पर भी भारतीय मॉडल की चर्चा
विश्वविद्यालय में ऊर्जा संकट और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन किया जा रहा है. छात्रा हिमांशी गुप्ता ने अपने शोध में सामुदायिक जल प्रबंधन, पारंपरिक पर्यावरण ज्ञान और टिकाऊ विकास मॉडल का विश्लेषण किया है.
बिहार की पारंपरिक जल प्रणाली पर रिसर्च
शोध में बिहार की आहार-पायने जल प्रणाली और हिमाचल प्रदेश की सामुदायिक पर्यावरण व्यवस्था का उदाहरण दिया गया है. इसमें बताया गया कि स्थानीय समुदाय पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा परिवर्तन में अहम भूमिका निभा सकते हैं. रिसर्च के मुताबिक भारतीय परंपराएं केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास का व्यावहारिक मॉडल भी हैं.
शिक्षा व्यवस्था में शामिल होगी शास्त्रार्थ परंपरा
नालंदा यूनिवर्सिटी अब भारतीय बहस परंपरा ‘शास्त्रार्थ’ को भी अपने शिक्षा ढांचे में शामिल करने की तैयारी कर रही है. कुलपति सचिन चतुर्वेदी का कहना है कि पश्चिमी बहसें अक्सर जीत और हार पर आधारित होती हैं, जबकि भारतीय परंपरा सामूहिक ज्ञान और संवाद को महत्व देती है.
भारतीय सोच से विश्व शांति का नया रास्ता
विश्वविद्यालय का मानना है कि रामायण और महाभारत से प्रेरित भारतीय दृष्टिकोण दुनिया को शांति, सहयोग और वैश्विक व्यवस्था को समझने का नया तरीका दे सकता है. यही वजह है कि यह अनोखा कोर्स अब देश और विदेश में चर्चा का विषय बनता जा रहा है.



