By Malay Ojha | Published: 26 September 2026 | 09:39 AM
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रोफेसर महेंद्र कुमार ठाकुर को न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध और लंबे अकादमिक योगदान के लिए Lifetime Achievement Award-2026 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पांडिचेरी विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित Society of Neurochemistry India के 40वें वार्षिक सम्मेलन में दिया गया।
24 से 26 सितंबर तक चले इस सम्मेलन में प्रोफेसर ठाकुर को बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क में होने वाले बदलाव और याददाश्त के नियंत्रण से जुड़े उनके महत्वपूर्ण शोध कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। अवार्ड Society of Neurochemistry India के अध्यक्ष प्रोफेसर अमिताभ चट्टोपाध्याय और पांडिचेरी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर प्रकाश बाबू ने प्रदान किया।
सम्मान के बाद साझा किया शोध अनुभव
अवार्ड प्राप्त करने के बाद अपने व्याख्यान में प्रोफेसर महेंद्र कुमार ठाकुर ने करीब पांच दशक के शोध और शिक्षण अनुभव को साझा किया। उन्होंने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में अपने लंबे शोध सफर और इस दौरान सामने आए अनुभवों पर चर्चा की।
दो दर्जन से ज्यादा छात्रों ने की PhD
प्रोफेसर ठाकुर के निर्देशन में दो दर्जन से अधिक शोधार्थियों ने PhD पूरी की है। उनके कई विद्यार्थी देश और विदेश के अलग-अलग शिक्षण और शोध संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस उपलब्धि को उनके अकादमिक और शोध योगदान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
2018 में BHU से हुए रिटायर
प्रोफेसर महेंद्र कुमार ठाकुर वर्ष 2018 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद भी उनका शोध और अकादमिक गतिविधियों से जुड़ाव जारी है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में वरिष्ठ वैज्ञानिक के तौर पर कार्य कर रहे हैं।
वैज्ञानिक संस्थाओं में भी दे रहे योगदान
प्रोफेसर ठाकुर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़े विशेषज्ञ सदस्य के तौर पर भी योगदान दे रहे हैं। न्यूरोसाइंस और मस्तिष्क से जुड़े उनके शोध कार्यों ने उन्हें इस क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय वैज्ञानिक के रूप में पहचान दिलाई है।
BHU के लिए भी उपलब्धि
प्रोफेसर ठाकुर को मिला यह सम्मान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। न्यूरोसाइंस में उनके शोध, शिक्षण और शोधार्थियों के मार्गदर्शन का लंबा अनुभव इस सम्मान के जरिए एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सामने आया है।



