Saturday, October 10, 2026
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National

मुंबई में ऑटो चलाते रहे पिता, बेटे ने NEET में मारी बाजी; 627 अंक से KGMU में MBBS सीट

By Malay Ojha | Published: 25 September 2026 | 08:54 AM

जौनपुर के देवकीपुर गांव के प्रभात कुमार यादव ने NEET UG 2026 में 627 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 3864 प्राप्त की है। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में MBBS की सीट मिली है। आर्थिक चुनौतियों के बीच हासिल की गई इस सफलता के बाद गांव में खुशी का माहौल है।

प्रभात के लिए यह सफलता पहली कोशिश में नहीं मिली। NEET के पहले प्रयास में उन्हें 504 अंक मिले थे, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों पर काम किया और दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। दूसरे प्रयास में स्कोर बढ़कर 627 पहुंच गया और KGMU में MBBS का रास्ता खुल गया।

मुंबई में पिता का संघर्ष
प्रभात की सफलता के पीछे उनके पिता महेंद्र कुमार यादव का लंबा संघर्ष भी है। वह करीब दो दशक से मुंबई में ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई के लिए वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गांव भेजते रहे।

छोटी चॉल में रहकर परिवार की जिम्मेदारी
परिवार से दूर मुंबई में रहने के दौरान महेंद्र कुमार यादव ने सीमित संसाधनों में जीवन बिताया। एक छोटी चॉल में रहकर ऑटो चलाने और परिवार का खर्च संभालने का सिलसिला वर्षों तक चलता रहा। बेटे की मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने के बाद परिवार के लंबे संघर्ष का एक बड़ा सपना पूरा हुआ।

पढ़ाई में शुरू से रहा अच्छा प्रदर्शन
प्रभात ने मुंगराबादशाहपुर के सेंट जोसेफ स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की और बाद में सिटी स्कूल से हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने हाईस्कूल में 89.44 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा पहुंचे और वहां से NEET की तैयारी आगे बढ़ाई।

परिवार ने मुश्किल समय में दिया साथ
प्रभात की तैयारी के दौरान आर्थिक परेशानी भी सामने आई। कोटा में कोचिंग और दूसरे खर्च परिवार के लिए आसान नहीं थे। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कोचिंग फीस में रियायत मिली और परिवार के रिश्तेदारों ने भी आर्थिक मदद की। इस सहयोग ने उनकी तैयारी जारी रखने में भूमिका निभाई।

गांव में दादा ने मनाया जश्न
प्रभात की सफलता की खबर गांव पहुंची तो परिवार और आसपास के लोगों में खुशी फैल गई। उनके दादा इन्द्र बहादुर यादव ने खुशी में नाचकर जश्न मनाया। प्रभात की सफलता अब परिवार के साथ आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

अब डॉक्टर बनने की राह पर प्रभात
504 अंक से शुरुआत करने के बाद 627 अंक तक पहुंचना प्रभात की तैयारी में आए बदलाव को दिखाता है। अब देवकीपुर गांव का यह युवा KGMU में MBBS की पढ़ाई करेगा। उसकी कहानी में NEET की रैंक के साथ उस परिवार का संघर्ष भी जुड़ा है, जिसने सीमित साधनों के बावजूद बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी।

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मुंबई में ऑटो चलाते रहे पिता, बेटे ने NEET में मारी बाजी; 627 अंक से KGMU में MBBS सीट

By Malay Ojha | Published: 25 September 2026 | 08:54 AM

जौनपुर के देवकीपुर गांव के प्रभात कुमार यादव ने NEET UG 2026 में 627 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 3864 प्राप्त की है। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में MBBS की सीट मिली है। आर्थिक चुनौतियों के बीच हासिल की गई इस सफलता के बाद गांव में खुशी का माहौल है।

प्रभात के लिए यह सफलता पहली कोशिश में नहीं मिली। NEET के पहले प्रयास में उन्हें 504 अंक मिले थे, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी की कमियों पर काम किया और दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। दूसरे प्रयास में स्कोर बढ़कर 627 पहुंच गया और KGMU में MBBS का रास्ता खुल गया।

मुंबई में पिता का संघर्ष
प्रभात की सफलता के पीछे उनके पिता महेंद्र कुमार यादव का लंबा संघर्ष भी है। वह करीब दो दशक से मुंबई में ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई के लिए वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गांव भेजते रहे।

छोटी चॉल में रहकर परिवार की जिम्मेदारी
परिवार से दूर मुंबई में रहने के दौरान महेंद्र कुमार यादव ने सीमित संसाधनों में जीवन बिताया। एक छोटी चॉल में रहकर ऑटो चलाने और परिवार का खर्च संभालने का सिलसिला वर्षों तक चलता रहा। बेटे की मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने के बाद परिवार के लंबे संघर्ष का एक बड़ा सपना पूरा हुआ।

पढ़ाई में शुरू से रहा अच्छा प्रदर्शन
प्रभात ने मुंगराबादशाहपुर के सेंट जोसेफ स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की और बाद में सिटी स्कूल से हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने हाईस्कूल में 89.44 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा पहुंचे और वहां से NEET की तैयारी आगे बढ़ाई।

परिवार ने मुश्किल समय में दिया साथ
प्रभात की तैयारी के दौरान आर्थिक परेशानी भी सामने आई। कोटा में कोचिंग और दूसरे खर्च परिवार के लिए आसान नहीं थे। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कोचिंग फीस में रियायत मिली और परिवार के रिश्तेदारों ने भी आर्थिक मदद की। इस सहयोग ने उनकी तैयारी जारी रखने में भूमिका निभाई।

गांव में दादा ने मनाया जश्न
प्रभात की सफलता की खबर गांव पहुंची तो परिवार और आसपास के लोगों में खुशी फैल गई। उनके दादा इन्द्र बहादुर यादव ने खुशी में नाचकर जश्न मनाया। प्रभात की सफलता अब परिवार के साथ आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

अब डॉक्टर बनने की राह पर प्रभात
504 अंक से शुरुआत करने के बाद 627 अंक तक पहुंचना प्रभात की तैयारी में आए बदलाव को दिखाता है। अब देवकीपुर गांव का यह युवा KGMU में MBBS की पढ़ाई करेगा। उसकी कहानी में NEET की रैंक के साथ उस परिवार का संघर्ष भी जुड़ा है, जिसने सीमित साधनों के बावजूद बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी।

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