By Malay Ojha | Published: 26 September 2026 | 02:04 PM
NEET PG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद डॉ. मोनिष कन्ना आर का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने 720 में 641 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की है। खास बात यह है कि इससे पहले उन्हें करीब 28 हजार रैंक मिली थी। इस बार अपनी तैयारी में बड़ा बदलाव करते हुए उन्होंने देशभर में पहला स्थान हासिल किया।
डॉ. मोनिष ने एक इंटरव्यू में बताया कि शुरुआत में वह सिर्फ MCQ हल करने पर ज्यादा ध्यान देते थे। बाद में उन्हें समझ आया कि इतने बड़े सिलेबस के लिए केवल सवाल हल करना काफी नहीं है। इसके बाद उन्होंने कॉन्सेप्ट, रिवीजन और गलतियों के विश्लेषण को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया।
10,425 MCQs और 445 लीडरबोर्ड
मोनिष की तैयारी में लगातार प्रैक्टिस की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने कुल 10,425 MCQs हल किए और 445 लीडरबोर्ड में हिस्सा लिया। इनमें 85 बार Rank 1 हासिल की। वह रोजाना करीब 100 सवाल हल करते थे और गलत सवालों के लिए अलग से ‘मिस्टेक नोटबुक’ बनाते थे।
तुरंत टेस्ट देने के बजाय पहले समझते थे कॉन्सेप्ट
मोनिष ने खुद को तेज सीखने वाला नहीं बताया। उनका तरीका यह था कि क्लास खत्म होते ही टेस्ट देने के बजाय वह पहले पूरे दिन की पढ़ाई को दोहराते थे। इसके बाद अगले दिन लीडरबोर्ड में शामिल होते थे। इस दौरान उनका मकसद सिर्फ रैंक हासिल करना नहीं, बल्कि अपनी गलतियों और कमजोर हिस्सों को पहचानना था।
वर्कबुक का 4 से 5 बार किया रिवीजन
NEET PG के बड़े सिलेबस को संभालने के लिए उन्होंने रिवीजन पर खास जोर दिया। परीक्षा से पहले अपनी वर्कबुक को चार से पांच बार दोहराया। हर रिवीजन में कमजोर टॉपिक्स को मार्क करते और अगली बार उन्हीं हिस्सों पर ज्यादा समय देते थे।
तेज पढ़ने की कोशिश से मिली बड़ी सीख
तैयारी के शुरुआती दौर में मोनिष तेजी से पढ़ाई पूरी करने की कोशिश करते थे। बाद में उन्हें लगा कि सिर्फ तेजी से पन्ने पलटने से विषय समझ में नहीं आ रहा। इसके बाद उन्होंने रफ्तार के बजाय कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझने पर ध्यान दिया। परीक्षा नजदीक आने पर उन्होंने टाइम-बाउंड रीडिंग शुरू की।
खराब टेस्ट के बाद तीन-चार हफ्ते नहीं पढ़ पाए
मोनिष की तैयारी का सफर भी हमेशा आसान नहीं रहा। एक टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बाद वह मानसिक रूप से काफी थक गए और करीब तीन से चार सप्ताह तक पढ़ाई नहीं कर सके। इस दौर से निकलने के लिए उन्होंने खुद पर पढ़ाई का दबाव डालने के बजाय लाइब्रेरी ज्वाइन की और अपना माहौल बदला।
मेडिटेशन, नींद और परिवार ने संभाला
बर्नआउट से उबरने के दौरान उन्होंने मेडिटेशन के साथ पर्याप्त नींद, वॉक और जॉगिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। माता-पिता ने भी इस मुश्किल दौर में उनका लगातार हौसला बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और धीरे-धीरे अपनी तैयारी की लय वापस हासिल की।
डॉ. मोनिष की कहानी में प्रैक्टिस और रिवीजन अहम
NEET PG 2026 में AIR 1 तक पहुंचने की उनकी कहानी में लगातार अभ्यास, बार-बार रिवीजन और गलतियों से सीखने का तरीका प्रमुख रहा। 641 अंक के साथ देश में टॉप करने वाले मोनिष ने अपने इंटरव्यू में मेंटर्स, फैकल्टी और खास तौर पर माता-पिता के सहयोग को भी सफलता का अहम हिस्सा बताया।



