यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही उम्मीदवारों को मिल पाती है. कई अभ्यर्थी पूरे दिन पढ़ाई करने के बावजूद सफल नहीं हो पाते, जबकि कुछ लोग नौकरी के साथ तैयारी करके भी बड़ी कामयाबी हासिल कर लेते हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है यशवी जैन की, जिन्होंने डेंटिस्ट की नौकरी करते हुए आईएएस बनने का सपना पूरा किया.
यशवी जैन राजधानी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके की रहने वाली हैं. उनके माता-पिता निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं. पढ़ाई में शुरू से ही तेज रहीं यशवी ने बारहवीं के बाद नीट परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल करने के बाद बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने डेंटिस्ट के रूप में काम करना शुरू कर दिया.
मामा से मिली सिविल सेवा की प्रेरणा
यशवी के परिवार में सरकारी सेवा से जुड़े उनके मामा ही थे, जो इंडियन इन्फॉर्मेशन सर्विस में अधिकारी थे. उन्हें देखकर ही यशवी के मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पैदा हुआ. धीरे-धीरे देश सेवा का यह सपना उनका लक्ष्य बन गया. यशवी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को भी देती हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया.
दिन में नौकरी, रात में यूपीएससी की तैयारी
यूपीएससी की तैयारी के दौरान यशवी की दिनचर्या बेहद चुनौतीपूर्ण रही. वह दिनभर मरीजों का इलाज करती थीं और रात में घंटों पढ़ाई करती थीं. नौकरी और पढ़ाई दोनों को साथ संभालना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर खुद को तैयार किया. वह नियमित रूप से नोट्स बनाती थीं और मॉक टेस्ट भी देती थीं.
पहले प्रयास में मिली असफलता
यशवी ने वर्ष 2023 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी. हालांकि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम किया और रणनीति में बदलाव किया. यही वजह रही कि दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया.
दूसरे प्रयास में बनीं आईएएस अधिकारी
साल 2025 में यशवी ने दोबारा परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ऑल इंडिया 97वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया. उनकी सफलता यह साबित करती है कि सिर्फ लंबे समय तक पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि लगातार और सही दिशा में मेहनत करना सबसे अहम होता है.
युवाओं को दिया खास संदेश
यशवी जैन का मानना है कि रोजाना नियमित पढ़ाई और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. उनका कहना है कि 10 से 15 घंटे पढ़ाई करने से ज्यादा जरूरी यह है कि बिना रुकावट हर दिन पढ़ाई जारी रखी जाए. उनकी कहानी आज लाखों यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.



